KEDARNATH TEMPLE

प्रिय मित्रों हमारे सनातन धर्म में भगवान शिव से सम्‍बन्धित कई प्रसिद्ध मन्दिरों का उल्‍लेख है। जिनमें से एक श्री केदारनाथ मन्दिर हैा जिसके बिना चार धाम यात्रा भी सम्‍पूर्ण नहीं हो सकती। अत- मित्रों आज इस लेख में मैं आपको KEDARNATH TEMPLE | केदारनाथ मंदिर का रहस्‍य | पंच केदार का रहस्‍य  क्‍या है। इस बारे में बताने जा रहा हूँ। मुझे पूर्ण विश्‍वास है कि मेरे द्वारा उपलब्‍ध कराई गई जानकारी आपको पसंद आयेगी।

 KEDARNATH TEMPLE | केदारनाथ मंदिर का रहस्‍य | पंच केदार का रहस्‍य

केदारनाथ मंन्दिर की कथा या केदारनाथ मंदिर का रहस्‍य।

केदारनाथ ज्‍योर्तिलिंग:- श्री केदारनाथ ज्‍योर्तिलिंग उतराखण्‍ड राज्‍य के अन्‍दर आने वाले रूद्रप्रयाग जिले में हिमालय की गोद में स्थित है। यह भगवान शिव के 12 ज्‍योर्तिलिंग में से 5 वें स्‍थान पर आता है तथा यह बहुत ही प्राचीन ज्‍योर्तिलिंग है साथ इस ज्‍योर्तिलिंग की यात्रा किये बिना भी आपकी चारधाम की यात्रा कभी पूर्ण नहीं हो सकती और यह पंचकेदार में भी गिना जाता है।

पाण्‍डवों से सम्‍बन्धित मान्‍यता के अनुसार।

प्राचीन मान्‍यता के अनुसार कहा जाता है कि जब पाण्‍डवों ने महाभारत का युद्ध जीत लिया था। तब उन्‍होंने उस युद्ध में उनके द्वारा मार दिये गये भाईयों/गुरूजनों आदि की हत्‍या के पापों से मुक्ति पाने के लिये। भगवान शंकर का आर्शीवाद प्राप्‍त करना चाहते थे। परन्‍तु भगवान शिव शंकर उनसे रूष्‍ट हो गए थे जिसके चलते भगवान शिव उन्‍हें दर्शन नहीं देना चाहते थे। भगवान शंकर जी के दर्शन पाने हेतु। सभी पाण्‍डव काशी भी गए परन्‍तु भगवान शिव उन्‍हें नहीं मिले। इसके पश्‍चात सभी पाण्‍डव भगवान शिव को खोजते हुए। हिमालय जा पहुंचे। परन्‍तु जैसा कि भगवान शिव पाण्‍डवों को दर्शन नहीं देना चाहते थे। इसलिये वे वहां से गायब होकर केदार नामक स्‍थान पर चले गये। KEDARNATH TEMPLE | केदारनाथ मंदिर का रहस्‍य | पंच केदार का रहस्‍य

पाण्‍डवों को दर्शन न देने के लिये भगवान शिव ने धारण किया बैल का रूप।KEDARNATH TEMPLE | केदारनाथ मंदिर का रहस्‍य | पंच केदार का रहस्‍य

सभी पाण्‍डव भी उनका पीछा करते-करते केदार नामक स्‍थान पर पहुँच गये। भगवान शंकर को पाण्‍डवों के आने के बारे में पता चल गया और उन्‍होंने बैल का रूप धारण किया तथा पास ही में उपस्थित अन्‍य पशुओं में जा मिले। अब जब पाण्‍डव भगवान शंकर को खोज रहे थे तथी उनकी दृष्टि वहां उपस्थित पशुओं पर पड़ी तथा वह समझ गये कि इनमें से ही कोई भगवान शंकर है

भीम ने धारा विशाल रूप भगवान शिव के बैल रूप को पकड़ने के लिये।

इसके बाद भीम ने अपना रूप इतना विशाल कर लिया। कि उनका एक पैर पहाड़ की एक चोटी पर और दूसरा पैर पहाड़ की दूसरी चोटी पर था। भीम के पैर के मध्‍य से अन्‍य पशु तो निकल गये परन्‍तु बैल के रूप धारण करे शिवजी नहीं निकले। अब भीम ने बैल बने शिवजी को पकड़ने की कोशिश की तो वह धरती में समाने लगे। भीम की पकड़ में बैल की पीठ वाला भाग आ गया। तभी से वह भाग वहीं पर स्‍थापित है तथा आज केदारनाथ धाम के रूप में प्रसिद्ध है।  KEDARNATH TEMPLE | केदारनाथ मंदिर का रहस्‍य यही है।

भगवान शिव ने दर्शन देकर किया पाण्‍डवों को पाप से मुक्‍त।

भगवान शिव पाण्‍डवों द्वारा उनके दर्शन पाने की लगन को देखकर बहुत ही प्रसन्‍न हुए तथा उन्‍होंने तत्‍काल सभी पांचों पाण्‍डवों को दर्शन देकर उन्‍हें पाप से मुक्‍त किया।

एक अन्‍य मान्‍यता के अनुसार KEDARNATH TEMPLE| केदारनाथ मंदिर का रहस्‍य

एक अन्‍य मान्‍यता के अनुसार भगवान विष्‍णु जी के दो अवतार थे एक थे महातपस्‍वी नर और दूसरे थे नारायण ऋषि। ये दोनों केदार की श्रृंग पर भगवान शिव की तपस्‍या कर रहे थे। इन दोनों की तपस्‍या से प्रसन्‍न होकर भगवान शंकर प्रकट हुए। तथा दोनाें ऋषियों की इच्‍छा अनुसार ज्‍योतिर्लिंग के रूप में केदार नामक स्‍थान पर सदैव वास करने का वरदान प्रदान किया। यह स्‍थान हिमालय के केदारनाथ में स्थित है। आईये अब जानते हैं पंच केदार का रहस्‍य

पंच केदार का रहस्‍य या कथा KEDARNATH TEMPLE | केदारनाथ मंदिर का रहस्‍य | पंच केदार का रहस्‍य

मित्रों जैसा कि इस लेख मैं ऊपर बता चूंका हूँ कि भगवान शिव ने कैदार नामक स्‍थान पर बैंल का रूप धारण किया था। तथा भीम ने उन्‍हें जब पकड़ने की कोशिश की तो भगवान शिव धरती में समाने लगे थे। तथी बैल की पीठ वाला भाग वहां रह गया। और अन्‍य भाग अलग-अलग स्‍थान पर प्रकट हुए। जोकि पंच केदार के नाम से जाने जाते है जो निम्‍न प्रकार है- धड़ वाला भाग काठमांडू में निकला। जोकि आज पशुपतिनाथ मंदिर के नाथ से प्रसिद्ध है। भुजाएं तुग में निकली जोकि तुंगनाथ के नाम से प्रसिद्ध है। नाभि महोश्‍वर में तथा जटा कल्‍पेश्‍वर । इन सभी स्‍थानों को पंचकेदार के नाम से जाना जाता है। तो मित्रों यहीं थी पंच केदार का रहस्‍य या कथा

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